गौमाता से अमृत: स्वर्णिम फाउंडेशन का पंचगव्य चिकित्सा मार्गदर्शन

Amrit from Gau Mata:Swaarnim Foundation’s Panchgavya Medical Guidance

गौमाता एक चलता फिरता चिकित्सालय है और उसमें औषधियों का भंडार है | सिर्फ हमको जानने की जरुरत है की हम देशी गाय के गोमूत्र, दूध, दही, घी एवं गोबर से कैसे मानव औषधियों में इसका कारगर उपयोग कर सकते है | उपरोक्त बात को लेकर स्वर्णिम नेचरसाइंस लिमिटेड के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर वीरेन्द्रकुमार जैन ने वर्ष 1998 से इस पर गहराई में जाने के लिए कई पुरातन शास्त्रों का अध्ययन प्रारम्भ किया और यह पाया की कई साध्य और असाध्य रोगों का इससे इलाज किया जा सकता है | एक 17 लोगों की टीम जिसमे एलोपेथी के एमडी डॉक्टर, एमबीबीएस डॉक्टर , आयुर्वेद के बीएएमएस डॉक्टर, आयुर्वेदाचार्य , अनुभवी वैद्य एवं केमिस्ट लिए गए | जिन्होंने लगातार अनुसन्धान कर पंचगव्य एवं दुर्लभ जड़ी बूटियों को मिलकर लगभग प्रत्येक बीमारी के लिए मेडिसिन्स तैयार कर ली | ये दवाइयाँ हजारों मरीजों को देकर उन पर क्लीनिकल ट्रायल्स एवं मेडिकल रिवीव्ज़ लिए गये और आश्चर्य जनक परिणाम प्राप्त हुए | जिन बीमारियों से लोग वर्षों से पीड़ित थे वे महीनों में अच्छे होने लगे | जिनमे प्रमुख बीमारियाँ है कैंसर , डायबिटीज,हाई ब्लडप्रेशर, अस्थमा,आईएलडी , सोरायसिस, एक्जिमा , सभी तरह के चर्मरोग , लिवर के रोग, किडनी रोग,मस्तिष्क रोग, गले के रोग,कान मुंह नाक रोग ,हृदय रोग,लंग्स के रोग,कब्जियत , एसिडिटी से लेकर पेट के सभी रोग , पाइल्स,फिस्टुला,फिशर,हड्डी रोग,मसल्स डिस्ट्रॉफी, एमएनडी, पैरालिसिस,स्त्रीरोग,शीघ्रपतन,नपुंसकता आदि अनेकों रोग |

“Gau Mata is a mobile medical clinic with a storehouse of medicines. All we need to know is how we can use indigenous cow urine, milk, yogurt, ghee, and cow dung in human medicine. In this regard, the Chairman and Managing Director  of    Swaarnim Nature Science Limited, Veerendrakumar Jain, began studying various ancient scriptures in depth in  1998   and  found   that many   curable and   incurable diseases can be treated with them. A team of 17 people, including allopathic MD doctors, MBBS doctors,  Ayurvedic   BAMS doctors , Ayurvedacharyas  , experienced physicians, and chemists, was assembled. They conducted continuous research and combined Panchgavya and rare herbs to prepare medicines  for  almost every  disease.  These   medicines were given to thousands of patients, and clinical trials and medical reviews were conducted, yielding remarkable results. Patients who had been  suffering from various diseases for years began to improve in just a few months. These diseases included cancer,diabetes, high blood pressure, asthma,IBD, psoriasis,eczema,all types of skin diseases, liver diseases, kidney diseases , brain  diseases,  throat  diseases ,  ear,  nose, and throat diseases, heart diseases, lung diseases, constipation, acidity, stomach ailments, piles, fistula, fissures, bone diseases, muscular dystrophy, MD, paralysis, female diseases, premature ejaculation, impotence, and many more.”

पूरे देश के अलावा विदेशों के मरीज भी इसका लाभ ले सकें , इस हेतु टेक्नोलॉजी का भरपूर उपयोग किया , वेबसाइट बनाई गई जिस पर प्रतिदिन 7 – 8 हजार मरीज विजिट करते है , अपनी बिमारियों के लक्षण सहित ऑनलाइन फॉर्म के साथ रिपोर्ट्स भेजते है और जैंस काऊ यूरिन थैरेपी हेल्थ क्लिनिक पर डॉक्टर्स से परामर्श प्राप्त कर इलाज प्रारम्भ करते है | ऑनलाइन एवं ऑफलाइन दोनों तरह की सुविधा उपलब्ध है |

In addition to patients from across the country, patients from foreign countries can also benefit from this. For this purpose, technology has been extensively used, and a website has been created where 7-8 thousand patients visit daily. They provide their symptoms along with an online form and reports, and then they receive consultation from doctors at the Jain Cow Urine Therapy Health Clinic and begin treatment. Both online and offline facilities are available.

20 वर्षों में 12 लाख मरीज़ों का पंचगव्य चिकित्सा से इलाज करने पर बना विश्व रिकॉर्ड ।स्व श्री बप्पी लहरी के करकमलों से वीरेन्द्रकुमार जैन को बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड्स लंदन ने विश्व रिकॉर्ड अवार्ड देकर सम्मानित किया ।

इस थैरेपी के खोजकर्ता वीरेन्द्रकुमार जैन ने 20 वर्षों में 12 लाख मरीजों का इलाज किया जिसे वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकार्ड्स लन्दन ने विश्व रिकॉर्ड घोषित कर प्रसिद्ध गायक बप्पी लहरी के हाथों सम्मानित कर वर्ल्ड रिकॉर्ड सर्टिफिकेट प्रदान किया |

अब स्वर्णिम फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष वीरेन्द्रकुमार जैन ने इसे विश्वव्यापी बनाने और हिंदुस्तान के घर घर में पंचगव्य थैरेपी को पहुँचाने के लिए चार तरह के पंचगव्य थैरेपी कोर्स प्रारम्भ किये है | जिसे कोई भी ग्रेजुएट डॉक्टर, इंटीग्रेटेड थेरेपिस्ट, आरएमपी डॉक्टर, ग्रेजुएट, अंडर ग्रेजुएट एवं दसवीं पास पुरुष महिला,युवा जिनकी उम्र 18 वर्ष से अधिक है ऑनलाइन कर सकते है |

स्वर्णिम फाउंडेशन मध्य प्रदेश शासन के आदेशानुसार 36000 जनस्वास्थ्य रक्षकों को ट्रेनिंग दी गई थी | इंदौर जिले के शासकीय डिस्पेंसरी के आयुर्वेदाचार्यों को भी ट्रेनिंग दे चुके है |

पंचगव्य थैरेपी मानव औषधी के रूप में जितनी कारगर है उतनी ही मृदा एवं फसलों में भी कारगर है | इस हेतु मध्यप्रदेश शासन के आदेशानुसार 360000 किसानों को जैविक/ प्राकृतिक खेती करने की भी ट्रेनिंग दी गई है | प्रत्येक कृषक तक इसे पहुँचाने के लिए भी कृषि आधारित पंचगव्य थैरेपी डिप्लोमा भी प्रारम्भ कर रहे है |

In addition to patients from all over the country, patients from foreign countries can also benefit from this. For this purpose, technology has been extensively used, and a website has been created. In the last 20 years, Dr. Veerendrakumar Jain, the researcher of this therapy, has treated 1.2 million patients, which has been recognized by the World Book of Records, London. He was honored with the World Record Certificate by famous singer Bappi Lahiri.

Now, the founder and chairman of Swaarnim Foundation, Veerendrakumar Jain, has initiated four different Panchagavya Therapy courses to make it global and reach every household in India. These courses are open for any graduate doctor, integrated therapist, RMP doctor, graduate, undergraduate, and 10th pass individuals, both male and female, aged 18 and above, who can apply online.

As per the Madhya Pradesh government’s orders, Swaarnim Foundation has provided training to 36,000 health workers. Training has also been given to Ayurvedacharyas of government dispensaries in Indore district.

Panchagavya Therapy is as effective in agriculture as it is in human medicine. For this purpose, as per the orders of the Madhya Pradesh government, training has been provided to 3,60,000 farmers for organic/natural farming. They are also initiating a diploma in Panchagavya Therapy for agriculture to reach it to every farmer.”

Regenerate

हमारा मिशन है आपको एक स्वस्थ समाज के साथ शिक्षित और स्वास्थ्यपूर्ण एक संभावित करियर के साथ जोड़ना।

OUR MISSION IS TO CONNECT YOU WITH A HEALTHY SOCIETY, ALONG WITH EDUCATION AND A POTENTIAL CAREER.

हमारा मिशन है कि हम आपको एक स्वास्थ्यपूर्ण जीवनशैली को प्रमोट करने और साथ ही शिक्षित बनाने के साथ एक संभावित करियर के साथ जोड़ें, जिससे आप और आपका समाज स्वस्थ रह सकें। हमारा लक्ष्य है कि आप अपनी प्रतिभा को एक ऐसे क्षेत्र में विकसित करें जहां आप स्वस्थ्य जीवनशैली को प्रमोट कर सकें और साथ ही साथ समाज के लिए शिक्षा को प्रशंसा करें।

शिक्षा और स्वस्थ जीवन को प्रमोट करना और करियर के अवसर : हम शिक्षा को सबसे महत्वपूर्ण मानते हैं और सभी क्षेत्रों में शिक्षित होने को प्रोत्साहित करने का प्रयास करते हैं। हम शिक्षा को प्राथमिकता देते हैं और उच्चतर शिक्षा और सामाजिक समावेश को बढ़ावा देते हैं, साथ ही साथ सामान्य जागरूकता को भी। हम विभिन्न शिक्षा परियोजनाओं का समर्थन करेंगे जो शिक्षा, समाज कल्याण, कृषि शिक्षा और जागरूकता पर ध्यान केंद्रित करते हैं, और छात्रों को स्वस्थ शिक्षा और विभिन्न करियर विकल्पों के बारे में ज्ञान प्रदान करेंगे।

Our mission is to promote a healthy lifestyle and connect it with a potential career, along with education. Our goal is to develop your talent in a way that you can contribute to a healthy society.

Promoting education and a healthy lifestyle: We prioritize education and strive to encourage being educated in all fields. We give primacy to education and promote higher education and social inclusion, along with raising awareness. We support various educational initiatives focusing on education, social welfare, agricultural education, and awareness, providing students with knowledge about healthy education and various career options.

 

 

म प्र के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंहजी चौहान से पंचगव्य थैरेपी की चर्चा करते हुए वीरेन्द्रकुमार जैन

भारत सरकार के राष्ट्रीय कामधेनु आयोग के चेयरमैन एवं कैंसर सर्जन डॉ वल्लभ भाई कथीरिया पंचगव्य से लाभान्वित कैंसर मरीज़ों की रिपोर्ट्स देखते हुए

स्वर्णिम फाउंडेशन एक ट्रस्ट शाखा है जो स्वास्थ्य, धन और करियर को प्रमोट करने के लिए है।। स्वर्णिम फाउंडेशन किसान किसानी विकास ट्रस्ट इंदौर का एक हिस्सा है, जो 1998 से ऑनलाइन और ऑफलाइन शिक्षा, सामाजिक कार्य, सेमिनार, शिविर, विवाह, कृषि शिक्षा, जैविक आदान-प्रदान, जैविक उत्पादों को प्रमोट करने के लिए काम कर रहा है। स्वर्णिम फाउंडेशन विभिन्न डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित कर रहा है जो BSS (भारत सेवक समाज), चेन्नई से संबद्ध है और विभिन्न क्षेत्रों में कैंपस / ऑनलाइन डिप्लोमा कार्यक्रम प्रदान करने का विकल्प देता है।

Swaarnim Foundation is a branch of the Farmer’s Development Trust, Indore, which has been working since 1998 to promote health, wealth, and careers through online and offline education, social work, seminars, workshops, weddings, agricultural education, organic provisioning, and the promotion of organic products. Swaarnim Foundation offers various diploma programs affiliated with BSS (Bharat Sevak Samaj), Chennai, and provides options for campus/online diploma programs in various fields.

आयुर्वेदिक फार्मेसी : स्वर्णिम नेचरसायंस लिमिटेड

आयुर्वेद के गहराई से, स्वर्णिम आपके जीवन में प्रकृति की खुशियों को लाने के लिए प्राचीन रहस्यों को लेकर आता है। विज्ञान के समर्थन से और प्यार से संगठित, स्वर्णिम के आयुर्वेदिक उत्पादों की श्रृंगार करती हैं जो प्रकृति की खुशियों को आपके जीवन में लाते हैं। डॉक्टर विरेन्द्र जैन द्वारा 1985 में स्थापित, जो की इंदौर के गौ मूत्र चिकित्सा के आयुर्वेदिक विशेषज्ञ भी हैं, स्वर्णिम नेचरसायंस के पास 100 से अधिक पेटेंटेड आयुर्वेदिक दवाईयां और स्वास्थ्य पूरक उत्पाद हैं। सिर्फ आपको वैकल्पिक चिकित्सा उपचार ही नहीं देने के साथ, स्वर्णिम आपके जीवनशैली की आवश्यकताओं को संगठित करने और आपको अंदर से ठीक करने में मदद करने के लिए व्यक्तिगत स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करता है। इसीलिए स्वर्णिम बस विज्ञान के समर्थन में ही नहीं है, बल्कि यह जीवन का पुनर्जीवित आयुर्वेदिक विज्ञान है।

AYURVEDIC PHARMACY : SWAARNIM NATURSCIENCE LIMITED

From the depths of Ayurveda, Swaarnim brings ancient secrets to infuse the joys of nature into your life. Scientifically supported and lovingly crafted, Swaarnim’s Ayurvedic products adorn your life, bringing nature’s happiness. Founded by Dr. Virendra Jain in 1985, who is an Ayurvedic specialist in Gau Mutra therapy from Indore, Swaarnim Nature Science boasts over 100 patented Ayurvedic medicines and wellness products. Not only offering alternative medical treatments, Swaarnim provides personalized healthcare services to organize your lifestyle and rejuvenate you from within. Thus, Swaarnim is not just in support of holistic science, but a revitalizing Ayurvedic science for life.

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंहजी गो मूत्र सेवन करते हुए, समीप हैं वीरेन्द्रकुमार जैन

पूर्व लोकसभा अध्यक्ष श्रीमती सुमित्रा महाजनजी गो मूत्र सेवन करते हुए, समीप हैं वीरेन्द्रकुमार जैन

क्लिनिक : जैनस काऊ यूरिन थेरेपी हेल्थ क्लिनिक

“जैन कौ मूत्र चिकित्सा थेरेपी” ने विभिन्न प्रकार के कैंसर, सिस्ट, ट्यूमर और नियोप्लास्मा से प्रभावित रोगियों के दुख को कम करने में साबित हो चुकी है हमारी दवाओं से

“वृद्धि रोकने और फैलाव को मारकर कैंसर कोशिकाओं को मारते हैं।”

वैद्यकीय अध्ययनों ने दिखाया है कि हमारे उत्पाद निम्नलिखित बीमारियों से राहत दिलाने में सहायता करते हैं:

स्तन कैंसर, सर्वाइकल/ सर्विक्स कैंसर, ओवेरियन कैंसर, ब्लड कैंसर CLL, ALL और CML, ल्यूकेमिया, लिम्फोमा, मल्टीपल मायलोमा, हड्डी कैंसर, मुख कैंसर, मुंह कैंसर, जीभ कैंसर, थायराइड कैंसर, गले कैंसर, कंठ कैंसर, मस्तिष्क कैंसर, मस्तिष्क ट्यूमर, कोलोरेक्टल कैंसर, गुटका कैंसर, त्वचा कैंसर, पेट कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर, रेनल सेल कार्सिनोमा, किडनी कैंसर, सरकोमा, सबमुकुस फाइब्रोसिस, मूत्राशय कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर, किडनी कैंसर, हेपेटोसेल्युलर कार्सिनोमा, लिवर कैंसर, सॉफ्ट टिश्यू सर्कोमा, ब्लास्टोमा, एनल कैंसर, कैपिलरी हेमैंजियोमा, गैलब्लैडर कैंसर, हॉजकिन का लिम्फोमा, नॉन-हॉजकिन का लिम्फोमा आदि। परिणाम रोगी की स्थिति पर आधारित होते हैं और यह प्रतिशत गारंटी नहीं की जा सकती है।

Clinic: JAIN COW URINE THERAPY HEALTH CLINIC

“Jain Cow Urine Therapy” has been proven to alleviate the suffering of patients affected by various types of cancer, cysts, tumors, and neoplasms with our medicines.

“Our products inhibit growth and kill cancer cells.”

Medical studies have shown that our products help in relieving the following diseases:

Breast cancer, cervical/cervix cancer, ovarian cancer, blood cancer (CLL, ALL, and CML), leukemia, lymphoma, multiple myeloma, bone cancer, mouth cancer, oral cancer, tongue cancer, thyroid cancer, throat cancer, laryngeal cancer, breast tumor, colorectal cancer, gutka cancer, skin cancer, stomach cancer, prostate cancer, renal cell carcinoma, kidney cancer, sarcoma, submucous fibrosis, bladder cancer, hepatocellular carcinoma, liver cancer, soft tissue sarcoma, blastoma, anal cancer, capillary hemangioma, gallbladder cancer, Hodgkin’s lymphoma, non-Hodgkin’s lymphoma, etc. Results vary based on the patient’s condition, and there is no guarantee of a certain percentage of success.

 

Regenerate

स्वामी अवधेशानंदजी महाराज से “पंचगव्य थैरेपी घर घर में” पहुँचाने हेतु चर्चा करते हुए वीरेन्द्रकुमार जैन

म प्र के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहानजी एवं इंदौर लोकसभा के सांसद श्री शंकर लालवानी जी से पंचगव्य थैरेपी की चर्चा

हमारे उत्पादों में प्रत्येक जड़ी बूटी का अर्क मॉडर्न विज्ञान के अनुसार कैंसर फार्माकोलॉजिकल गतिविधियों के रूप में अनुसंधान किया गया है और पुनर्स्थापित किया गया है, जिससे साबित हुआ है कि ये जड़ी बूटियां कैंसर के इलाज में कारगर हैं और गौ मूत्र को मॉडर्न चिकित्सा (अलोपैथी) और जड़ी बूटी के अर्क के साथ कैंसर रोगों के उपचार की प्रभावकारिता और अवशोषण को सुधारने के लिए पेटेंट दिया गया है। हमारे उत्पादों में फार्माकोलॉजिकल गतिविधियां हैं जैसे:

  • एंटी-ट्यूमर, एंटीऑक्सीडेंट, एनेल्जेसिक, एंटीबैक्टीरियल * सूजन, दर्द और बुखार को कम करने में मदद करते हैं *शरीर की कोशिकाओं को हानि पहुंचाने वाले मुक्त रेडिकल के प्रभावों से रक्षा करते हैं * एंटीस्पास्मोडिक गुण: मांसपेशियों और अंगों के स्वेच्छा अकड़न को दबाने में मदद करते हैं ,तनाव को कम करते हैं * इम्यून सिस्टम को बढ़ाने में मदद करने वाले एक इम्यूनोस्टिमुलेटर के रूप में कार्य करते हैं।

हम केवल कैंसर रोगियों के इलाज ही नहीं करते, बल्कि त्वचा, मधुमेह, दमा, हृदय, तंत्रिका और अन्य सभी प्रकार के पुराने रोगों का सफलतापूर्वक उपचार भी करते हैं। हमारी दवाओं को पेटेंट मिली है।

हमारी दवाओं में हमने गौ मूत्र का उपयोग किया है, जिसे वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित किया गया है कि यह जीवाणुरोधी और जीवाणुनाशक एजेंट्स सहित जैविक अणुओं की गतिविधि को बढ़ाने वाले उपयोग के रूप में है। इस आविष्कार का सीधा प्रभाव होता है कि कि जीवाणुरोधी, दवाओं और जीवाणुनाशक एजेंट्स के खुराक को भारी हद तक कम किया जाता है, साथ ही जीवाणुरोधी अणुओं की अवशोषण क्षमता को बढ़ाने से इलाज की लागत और जहरता के कारण होने वाले परिणामों को कम किया जाता है।

Our products have undergone research and have been patented for their efficacy in cancer pharmacological activities, in accordance with modern science. It has been proven that these herbal remedies are effective in the treatment of cancer, along with cow urine, by improving the effectiveness and absorption of cancer patients with modern medicine (allopathy) and herbal extracts. Our products have pharmacological activities such as:

  • Anti-tumor
  • Antioxidant
  • Analgesic
  • Antibacterial
  • Anti-inflammatory: They help reduce swelling, pain, and fever.
  • Protection against the effects of free radicals, which harm the body’s cells.
  • Antispasmodic properties: They help relieve involuntary contractions of muscles and organs, reducing stress.
  • Immune system enhancement as an immunostimulant.

We don’t just treat cancer patients; we also successfully treat a wide range of other chronic diseases, including skin problems, diabetes, asthma, heart conditions, nervous disorders, and more. Our medicines are patented.

In our medicines, we have utilized cow urine, which has been scientifically proven to have biocidal and bactericidal agents along with the activity of bio-molecules that enhance the activity of biological molecules. This discovery directly affects that the dose of antibiotics and bactericides is reduced substantially, along with an increase in the absorption capacity of antibiotics, thus reducing the cost of treatment and the side effects due to toxicity.

पंचगव्य आधारित प्लांट प्रोटेक्शन, पेस्टिसाइड्स एवं फ़र्टिलाइज़र 

भारत सरकार के योजना आयोग द्वारा अनुशंसित भारत सेवक समाज द्वारा युवाओं के लिए कई तरह के वोकेशनल कोर्स प्रारम्भ किये गए है | उसमे से कृषि आधारित एक डिप्लोमा कोर्स भी हम आपके लिए लेकर आये है वो है “प्लांट प्रोटेक्शन एंड पेस्टिसाइड्स मैनेजमेंट” । यह एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है जो कृषि उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

इस कोर्स में खास बात यह रहेगी की आप सभी प्लांट प्रोटेक्टर , पेस्टीसाइड्स और फ़र्टिलाइज़र का निर्माण देशी गाय के गोमूत्र और गोबर से कर सकेंगे | इस क्षेत्र में हमारा 25 वर्षों का अनुभव है | मध्यप्रदेश शासन के आदेशानुसार पूर्व में हमने लाखों कृषकों को जैविक और प्राकृतिक खेती की  ट्रेनिंग  दी है |  कई तरह के कृषि आदान बनाये है  जिनमे  प्रमुख है लिक्विड यूरिया फ़र्टिलाइज़र, एजोटोबेक्टर , राइज़ोबियम, पीएसबी ,पोटाश घोलक जीवाणु  लिक्विड फ़र्टिलाइज़र , बीजोपचार मल्टीकल्चर जीवाणु  किट ,बायोडायनामिक फार्मूला 501 और 502 , फसल रक्षक,पेस्टिसाइड्स,टॉनिक,इंसेक्टिसाइड आदि | 

बढ़ते जनसंख्या और खाद्य सुरक्षा के मद्देनजर, फसलों की सुरक्षा और प्रबंधन का महत्व बढ़ गया है। प्लांट प्रोटेक्शन उन सभी तकनीकों और उपायों का समूह है जो फसलों को कीटों, कीटाणुओं, रोगों, फंगस और नष्टकारक जैविक मिट्टी की हानिकारक प्रभावों से बचाने में मदद करता है। पेस्टिसाइड्स मैनेजमेंट इसका महत्वपूर्ण घटक है, जो विभिन्न कीटनाशकों, उर्वरकों और रोगनाशकों का उपयोग करके कीटों और रोगों के प्रभाव को नष्ट करने में मदद करता है।

डिप्लोमा इन प्लांट प्रोटेक्शन एंड पेस्टिसाइड्स मैनेजमेंट कोर्स छात्रों को यह ज्ञान प्रदान करता है कि कैसे फसलों की सुरक्षा की जाए और उत्पादन को बढ़ाने के लिए उपयोगी तकनीकों का उपयोग किया जाए। यह कोर्स छात्रों को उन उत्पादों की जानकारी और कौशल प्रदान करता है जो कीटनाशकों, उर्वरकों और रोगनाशकों का उपयोग करके फसलों की सुरक्षा में मदद कर    सकते हैं। यह छात्रों को संगठित प्रबंधन प्रक्रियाओं, सुरक्षा मानकों, फसल संरक्षा की प्रक्रियाओं और पर्यावरणीय प्रभावों की समझ प्रदान करता है।

प्लांट प्रोटेक्शन और पेस्टिसाइड्स मैनेजमेंट का एक महत्वपूर्ण पहलू है कीटनाशकों और उर्वरकों के सही उपयोग का ध्यान रखना। हमें इन पदार्थों के संप्रबंधन की आवश्यकता है ताकि फसलों को हानि न हो और पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचे। इसे सुनिश्चित करने के लिए हमें सही खेती व्यवस्था, सटीक अनुमानित प्रकोप अवधि, उपयुक्त खेती तकनीक और उचित विधियों का पालन करना चाहिए।

प्लांट प्रोटेक्शन एंड पेस्टिसाइड्स मैनेजमेंट कोर्स आपको इस दिशा में विशेषज्ञता प्रदान करेगा। यह आपको कृषि उत्पादन के मानकों का ध्यान रखते हुए उच्चतम प्रभावीता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उच्चतम मानकों का पालन करने की क्षमता प्रदान करेगा। इसके अलावा, आपको नवीनतम प्रौद्योगिकी, अनुसंधान और उद्यम के विकास से अवगत कराया जाएगा।

प्लांट प्रोटेक्शन और पेस्टिसाइड्स मैनेजमेंट डिप्लोमा कोर्स आपके करियर को एक नई ऊंचाई प्रदान कर सकता है। यह आपको कृषि उत्पादन के माध्यम से सामरिक, आर्थिक और पर्यावरण स्थायित्व प्रदान कर सकता है। इसलिए, इस कोर्स के माध्यम से आपकी ज्ञान, कौशल और उपेक्षा का एक नया स्तर प्राप्त करें और इस क्षेत्र में सफलता प्राप्त करें।

जैविक/प्राकृतिक खेती हेतु लगातार 15 वर्षों तक अहिंसक खेती मासिक पत्रिका का प्रकाशन भी किया है | अभी पंचगव्य आधारित स्वर्णिम मैगज़ीन का नियमित प्रकाशन कर रहे है 

PANCHGAVYA-BASED PLANT PROTECTION, PESTICIDES, AND FERTILIZERS

The Indian government, through the NITI Aayog (National Institution for Transforming India), has recommended various vocational courses for young people. Among them is a diploma course in “Plant Protection and Pesticides Management,” which is crucial in the field of agriculture.

One special feature of this course is that it enables you to produce plant protectors, pesticides, and fertilizers using indigenous cow urine and cow dung. We have over 25 years of experience in this field. According to the orders of the Government of Madhya Pradesh, we have provided training in organic and natural farming to millions of farmers. We have also developed various agricultural inputs, including liquid urea fertilizer, Azotobacter, Rhizobium, PSB, liquid potassium- solubilizing bacteria, beneficial microorganisms for seed treatment, Bio-dynamic formulations 501 and 502, crop protectors, pesticides, tonics, insecticides, etc.

With the growing population and the importance of food security, the protection and management of crops have become more critical. Plant protection encompasses all the techniques and methods that help safeguard crops from harmful effects caused by pests, pathogens, fungi, and detrimental soil biota. Pesticides management is a vital component, involving the use of various pesticides, fertilizers, and fungicides to combat the impact of pests and diseases effectively.

The “Diploma in Plant Protection and Pesticides Management” course provides students with the knowledge of how to ensure crop safety and utilize various techniques to enhance production. This course imparts knowledge to students about products that can be produced from plant protectors, pesticides, and fertilizers, using indigenous cow urine and cow dung. It equips students with an understanding of organized management processes, safety standards, crop protection procedures, and environmental impacts.

An essential aspect of plant protection and pesticides management is the correct use of pesticides and fertilizers. Proper management of these substances is necessary to prevent crop damage and minimize environmental harm. To achieve this, it is essential to follow correct agricultural practices, accurate estimation of pest infestation duration, appropriate farming techniques, and proper methods.

The Diploma in Plant Protection and Pesticides Management course can provide you with expertise in this field. It can help you attain a successful career by providing you with the knowledge and skills needed to ensure the highest efficacy and safety in agriculture. Additionally, it keeps you informed about the latest technology, research, and developments in the field.

This course can take your career to new heights, especially in the realm of organic/natural farming, and it provides information about sustainable and eco-friendly farming practices. We have been publishing the monthly magazine “Ahinsak Kheti” for sustainable farming for 15 continuous years.

For the past 15 years, we have been consistently publishing a monthly magazine dedicated to organic/natural farming called “Ahinsak Kheti.” Currently, we are also regularly publishing the “Swarnim Magazine” based on Panchgavya (cow-based) principles.

OUR MISSION IS TO EDUCATE /HEALTHY SOCIETY WITH YOUR A HEALTH VIABLE CAREER